शंकराचार्य जी

पारंपरिक
महादेव संत साहित्य Bhakt Aadi Guru Shankaracharya Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल | आदि गुरु शंकराचार्य

गुरु - आचार्य गोविन्दपाद

आराध्य - भगवान शिव

जन्म - 508 ईसा पूर्व | आदि शंकराचार्य जयंती

जन्म स्थान - कालड़ी, केरल

दर्शन - अद्वैत वेदान्त

मृत्यु - 477 ईसा पूर्व, 32 वर्ष की उम्र में, केदारनाथ के समीप

पिता - श्री शिवगुरु भट्ट

माता - सुभद्रा

प्रथम शिष्य - श्री पद्मपादाचार्य (सनन्दन जी)

❀ आद्य शंकराचार्य को भगवान शिव अवतार के रूप मे माना जाता है।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्तमाल | आदि गुरु शंकराचार्य | गुरु - आचार्य गोविन्द भगवत्पाद | आराध्य - भगवान शिव | दर्शन - अद्वैत वेदान्त Bhaktamal | Aadi Guru Shankaracharya | Guru - Acharya Govind Bhagavatpad | Aaradhya - Lord Shiva | Place of Birth - Kalady, Kerala | Philosophy - Advaita Vedanta

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।