शंकर मेरा प्यारा.. माँ री माँ मुझे मूरत ला दे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

शंकर मेरा प्यारा,

शंकर मेरा प्यारा ।

माँ री माँ मुझे मूरत ला दे,

शिव शंकर की मूरत ला दे ।

मूरत ऐसी जिस के सर से,

निकले गंगा धरा ॥

शंकर मेरा प्यारा,

शंकर मेरा प्यारा ।

माँ री माँ वो डमरू वाला,

तन पे पहने मृग की छाला ।

रात मेरे सपनो में आया,

आ के मुझ को गले लगाया ।

गले लगा कर मुझ से बोला,

मैं हूँ तेरा रखवाला ॥

शंकर मेरा प्यारा,

शंकर मेरा प्यारा ।

माँ री माँ मुझे मूरत ला दे,

शिव शंकर की मूरत ला दे ।

मूरत ऐसी जिस के सर से,

निकले गंगा धरा ॥

शंकर मेरा प्यारा,

शंकर मेरा प्यारा ।

माँ री माँ वो मेरा स्वामी,

मैं उस के पट की अनुगामी ।

वो मेरा है तारण हारा,

उस से मेरा जग उजारा ।

है प्रभु मेरा अन्तर्यामी,

सब का है वो रखवाला ॥

शंकर मेरा प्यारा,

शंकर मेरा प्यारा ।

माँ री माँ मुझे मूरत ला दे,

शिव शंकर की मूरत ला दे ।

मूरत ऐसी जिस के सर से,

निकले गंगा धरा ॥

शंकर मेरा प्यारा,

शंकर मेरा प्यारा ।

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।