शंकर का डमरू बाजे रे: शिव भजन

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

शंकर का डमरू बाजे रे,

कैलाशपति शिव नाचे रे ॥

जटाजूट में नाचे गंगा,

शिव मस्तक पर नाथे चंदा,

नाचे वासुकी नीलकंठ पर,

नागेश्वर गल साजे रे,

शंकर का डमरू बाजे रे,

कैलाशपति शिव नाचे रे ॥

सीस मुकुट सोहे अति सुंदर,

नाच रहे कानन में कुंडल,

कंगन नूपुर चर्म-ओढ़नी,

भस्म दिगम्बर राजे रे,

शंकर का डमरू बाजे रे,

कैलाशपति शिव नाचे रे ॥

कर त्रिशूल कमंडल साजे,

धनुष-बाण कंधे पै नाचे,

बजे 'मधुप' मृदंग ढोल डफ,

शंख नगारा बाजे रे,

शंकर का डमरू बाजे रे,

कैलाशपति शिव नाचे रे ॥

SantoKiVani Lyrics

तीनलौक डमरू जब बाजे,

डम डम डम डम की ध्यनि गाजे,

ब्रह्म नाचे, विष्णु नाचे,

अनहद का स्वर गाजे रे,

शंकर का डमरू बाजे रे,

॥ दोहा ॥

कैलाशपति शिव नाचे रे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।