शम्भू शम्भू शम्भू बोल मना, जग का क्या पता

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

शम्भो शम्भो शम्भो बोल मना,

जग का क्या पता,

शम्भू शम्भू शम्भू बोल मना,

जग का क्या पता,

शम्भू शम्भू शम्भू बोल मना,

जग का क्या पता,

जग तो है माया,

जन है खिलौना,

कण कण में है तेरा वास,

शम्भू शम्भू शम्भू बोल मना,

जग का क्या पता ॥

यदि काल है इस जग में,

महाकाल है मेरे बाबा,

यदि बंधन है इस जग में,

मोक्ष दाता है मेरे बाबा,

सृष्टि है इस जग की,

संचारक है मेरे बाबा,

विष है जो इस जग में,

विषधारी है मेरे बाबा,

ॐ के रंग में रंग दे जो सबको,

कहते है सब नमः शिवाय,

शम्भू शम्भू शम्भू बोल मना,

जग का क्या पता ॥

बड़ा भोला भोला भंडारी,

हर लेता है पीड़ा सारी,

उज्जयनी के हो तुम राजा,

विराजे संग माता गिरिजा,

रामेश्वर बोले शम्भू,

महाकालेश्वर बोले शम्भु,

काशी का कणकण बोले शम्भू,

शम्भू शम्भू बस शम्भू,

ओ कैलाशी हो अविनाशी,

भस्म रमाये दिन रात,

विष क्या है महादेव से पूछो,

देव से पूछो ना ये बात,

शम्भू शम्भू शम्भू बोल मना,

जग का क्या पता ॥

शम्भू शम्भू शम्भू बोल मना,

जग का क्या पता,

शिवाय शिव शिव बोल मना,

तन का क्या पता,

भोले भोले भोले बोल मना,

धन का क्या पता,

शम्भो शम्भो शम्भो बोल मना,

॥ दोहा ॥

जग का क्या पता ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।