श्री शाकुम्भरी देवी जी की आरती

पारंपरिक
महादेव आरती Aarti Shakumbhari Devi Aarti Aarti
॥ पावन पाठ ॥

हरि ओम श्री शाकुम्भरी अंबा जी की आरती क़ीजो

एसी अद्वभुत रूप हृदय धर लीजो

शताक्षी दयालू की आरती किजो

तुम परिपूर्ण आदि भवानी माँ,

सब घट तुम आप भखनी माँ

शकुंभारी अंबा जी की आरती किजो

तुम्ही हो शाकुम्भर,

तुम ही हो सताक्षी माँ

शिवमूर्ति माया प्रकाशी माँ

शाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो

नित जो नर नारी अंबे आरती गावे माँ

इच्छा पूरण किजो,

शाकुम्भर दर्शन पावे माँ

शाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो

जो नर आरती पढ़े पढ़ावे माँ,

जो नर आरती सुनावे माँ

बस बैकुण्ठ शाकुम्भर दर्शन पावे

शाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री शाकुम्भरी देवी जी की आरती | Shakumbhari Devi Ki Aarti

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।