शबरी

पारंपरिक
श्री कृष्ण संत साहित्य Bhakt Mata Shabri Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमालः शबरी

वास्तविक नाम - श्रमण

अन्य नाम - माता शबरी

गुरु - ऋषि मातंग

आराध्य - भगवान श्री राम

जन्म - कृष्ण पक्ष सप्तमी, फाल्गुन

जन्म स्थान - शिवरीनारायण, छत्तीसगढ़

वैवाहिक स्थिति - विवाहित

भाषा - मैथिली

प्रसिद्ध - श्री राम भक्त

हिंदू महाकाव्य रामायण में सबरी एक बुजुर्ग महिला तपस्वी हैं। उनकी भक्ति के कारण उन्हें भगवान राम के दर्शन का आशीर्वाद मिला। वह भील समुदाय की शाबर जाति से संबंधित थी इसी कारण से बाद में उसका नाम शबरी रखा गया।

शास्त्रों के अनुसार, भले ही सैकड़ों अन्य योगी अपने आश्रमों में भगवान राम के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे, भगवान केवल शबरी के आश्रम में उनकी सच्ची भक्ति के कारण गए थे। इस अवसर पर माता शबरी ने श्री राम का आश्रम में स्वागत करने के बाद उन्हें जूठे के बेर खिलाए। उधर श्रीराम ने जूठे के बेर बड़े चाव से खाए थे। जूठे के बेर खिलाने के पीछे छिपी थी प्रेम की भावना। अब माता के मन में शंका हुई कि बेर भी खट्टे हैं। इसके लिए माता पहले स्वयं बेर चखती थीं और फिर वही बेर श्री राम को खिलाती थीं। जब माता शबरी को खट्टे बेर मिले तो उन्होंने भगवान को नहीं दिये। शेषनाग अवतार लक्ष्मण यह दृश्य देखकर चकित रह गए।

इससे पता चलता है कि भक्ति में देवताओं को दोष नहीं दिखते। भगवान राम शबरी के श्रम से बने फलों के कटोरे को देखकर प्रभावित होते हैं और इसलिए पेड़ को आशीर्वाद देते हैं ताकि पत्ते स्वाभाविक रूप से कटोरे के आकार में बढ़े। रामायण में कहा गया है कि शबरी अत्यंत तेजस्वी और ज्ञानी संत थीं। भगवान और भक्त की यह प्रेम भावना अकल्पनीय थी। इसलिए हर साल शबरी जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्तमालः शबरी | Bhaktamal: Shabri

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।