सीता कल्याण वैभोगमे

पारंपरिक
श्री कृष्ण मंत्र Mantra Maa Sita Mantra
॥ पावन पाठ ॥

सीता कल्याण वैभोगमे

राम कल्याण वैभोगमे

पवनज स्तुति पात्र पावन चरित्र

रवि सोम वर नेत्र रमणीय गात्र

भक्त जन परिपाल भरित शर जाल

भुक्ति मुक्तिद लील भू-देव पाल

पाम(रा)सुर भीम परिपूर्ण काम

श्याम जग(द)भिराम साकेत धाम

सर्व लो(का)धार सम(रै)क वीर

गर्व मानव दूर कन(का)ग धीर

निग(मा)गम विहार निरुपम शरीर

नग ध(रा)घ विदार नत लो(का)धार

परमेश नुत गीत भव जलधि पोत

तरणि कुल सञ्जात त्यागराज नुत

सीता कल्याण वैभोगमे की रचना भक्तिमार्गी कवि एवं कर्णाटक संगीत के महान संगीतज्ञ संत त्यागराज जी ने की थी। सुंदर सीता कल्याण वैभोगमे कर्णाटक में होने वाले विवाहों का एक पवित्र एवं लोकप्रिय मंगल गीत भी है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।