सावन की बरसे बदरिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सावन की बरसे बदरिया

सावन की बरसे बदरिया,

माँ की भीगी चुनरीया,

भीगी चुनरिया माँ की ॥

लाल चुनड माँ की चम चम चमकै,

माथे कि बिंदिया भी दम दम दमकै,

हाथो मे झलके कंगणिया,

माँ की भिगी चुनरिया ॥

॥ सावन की बरसे बदरिया...॥

छाई हरियाली, झूमे अम्बुआ की डाली,

होके मतवाली, कुके कोकलिया काली,

बादल मे कडके बिजुरिया,

माँ की भीगी चुनरिया ॥

॥ सावन की बरसे बदरिया...॥

ऊँचा भवन तेरा ऊँचा है डेरा,

कैसे चढूं, पाँव फ़िसले है मेरा,

तेढी मेढी है डगरिया,

माँ की भीगी चुनरिया ॥

॥ सावन की बरसे बदरिया...॥

काली घता पानी भर भर के लाई,

झूला झुले जगदम्बे भवानी,

हम सब पे माँ की नजरिया,

माँ की भीगी चुनरिया ॥

॥ सावन की बरसे बदरिया...॥

सावन की बरसे बदरिया

सावन की बरसे बदरिया,

माँ की भीगी चुनरीया,

भीगी चुनरिया माँ की॥

Santo Ki Vani Lyrics

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।