सत नाम का सुमिरन कर ले

संत कबीर
विष्णु भगवान भजन Bhajan Guru Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सत नाम का सुमिरन कर ले,

कल जाने क्या होय,

जाग जाग नर निज आश्रम में,

काहे बिरथा सोय,

काहे बिरथा सोय,

सतनाम का सुमिरन कर ले,

कल जाने क्या होए ।

जेहि कारन तू जग में आया,

वो नाहीं तूने करम कमाया,

मन मैला का मैला तेरा,

काया मल मल धोये,

सतनाम का सुमिरन कर ले,

कल जाने क्या होए ।

जाग जाग नर निज आश्रम में,

काहे बिरथा सोय,

काहे बिरथा सोय,

सतनाम का सुमिरन कर ले,

कल जाने क्या होए ।

दो दिन का है रैन बसेरा,

कौन है मेरा कौन है तेरा,

हुवा सवेरा चले मुसाफिर,

अब क्या नयन भिगोय,

सतनाम का सुमिरन कर ले,

कल जाने क्या होए ।

जाग जाग नर निज आश्रम में,

काहे बिरथा सोय,

काहे बिरथा सोय,

सतनाम का सुमिरन कर ले,

कल जाने क्या होए ।

गुरू का शबद जगा ले मन में,

चौरासी से छूटे क्षण में,

ये तन बार बार नहीं पावै,

शुभ अवसर क्यों खोय,

सतनाम का सुमिरन कर ले,

कल जाने क्या होए ।

जाग जाग नर निज आश्रम में,

काहे बिरथा सोय,

काहे बिरथा सोय,

सतनाम का सुमिरन कर ले,

कल जाने क्या होए ।

ये दुनियाँ है एक तमाशा,

कर नहीं बंदे इसकी आशा,

कहै कबीर, सुनो भाई साधो,

सांई भजे सुख होय,

सतनाम का सुमिरन कर ले,

कल जाने क्या होए ।

जाग जाग नर निज आश्रम में,

काहे बिरथा सोय,

काहे बिरथा सोय,

सतनाम का सुमिरन कर ले,

कल जाने क्या होए ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।