सत्य साईं बाबा

पारंपरिक
श्री राम संत साहित्य Bhakt Sathya Sai Baba Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल | सत्य साईं बाबा

वास्तविक नाम - रत्नाकरम सत्यनारायण राजू

अन्य नाम: पुट्टपर्थी सत्य साईं बाबा

आराध्य - शिव जी

जन्म - 23 नवंबर 1926

जन्म स्थान - पुट्टपर्थी, आंध्र प्रदेश

निधन: 24 अप्रैल 2011 (आयु 84 वर्ष), पुट्टपर्थी

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

भाषा - तमिल, तेलुगु, कन्नड़, अंग्रेजी और हिंदी

पिता - पेद्दावेंकम राजू रत्नाकरम

माता - मीसरगंडा ईश्वरम्मा

संस्थापक: सत्य साईं संगठन

दर्शनशास्त्र: सबसे प्यार करो, सबकी सेवा करो, हमेशा मदद करो, कभी दुःख न दो

सत्य साईं बाबा एक भारतीय गुरु थे। चौदह वर्ष की आयु में उन्होंने दावा किया कि वह शिरडी साईं बाबा के अवतार थे और अपने भक्तों की सेवा करने के लिए अपना घर छोड़ दिया। उनका निवास प्रशांति निलयम आश्रम था, जो तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करता है। श्री सत्यसायि अष्टोत्तर शतनामावलि पढ़ें।

साईं बाबा के भक्त उन्हें चमत्कारों का श्रेय देते हैं। उनके भक्त मानते हैं कि उनकी दिव्यता अपरंपार है। उन्होंने आध्यात्मिकता, बौद्धिकता और प्रेम के संदेशों का प्रसार किया, जिसका सामंजस्य परम शांति में परिणत होता है। उनकी काफी बड़ी हस्तियां अनुयायी है जिनमें भारत के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर भी हैं।

पवित्र कार्य:

सत्य साईं बाबा द्वारा स्थापित सत्य साईं संगठन, "अपने सदस्यों को आध्यात्मिक उन्नति के साधन के रूप में सेवा गतिविधियों को करने में सक्षम बनाने के लिए", 126 देशों में 1,200 से अधिक सत्य साईं केंद्र हैं। इस संगठन के माध्यम से, सत्य साईं बाबा ने मुफ्त सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों और सामान्य अस्पतालों, क्लीनिकों, पेयजल परियोजनाओं, एक विश्वविद्यालय, सभागारों, आश्रमों और स्कूलों का एक नेटवर्क स्थापित किया है।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्तमाल | सत्य साईं बाबा - Bhaktamal | Sathya Sai Baba

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।