सतगुरु की कृपा: जब चींटी पर हुई गुरु कृपा

पारंपरिक
विष्णु भगवान कथा Prerak-kahani Guru Prerak-kahani
॥ पावन पाठ ॥

एक संत ने बहुत सुंदर उदाहरण दिया। वे कहते थे कि अगर किसी चींटी को हरिद्वार से ऋषिकेश खुद जाना हो, तो उसे तीन-चार जन्म लग सकते हैं। लेकिन अगर वही चींटी किसी इंसान के कपड़ों पर चढ़ जाए, तो वह तीन-चार घंटों में अपनी मंज़िल तक पहुँच सकती है।

इसी तरह, अगर हम परमपिता परमेश्वर से मिलना ही चाहते हैं, तो हमें कभी भी अपने गुरु का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। ये गुरु ही हमें सही रास्ता दिखाते हैं और पापों के सागर को पार करने में हमारी मदद करते हैं, तथा उस परमात्मा को पाने का सही मार्ग दिखाते हैं।

आइए हम सब अपने दिलों में प्यार रखें, नफ़रत को दूर करें और सभी धर्मों का सम्मान करें। हर इंसान को प्यार, शांति और सम्मान मिले। धन्यवाद।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

एक संत ने बहुत सुंदर उदाहरण दिया। वे कहते थे कि अगर किसी चींटी को हरिद्वार से ऋषिकेश खुद जाना हो, तो उसे तीन-चार जन्म लग सकते हैं। A saint gave a very beautiful example. He used to say that if an ant has to go from Haridwar to Rishikesh on its own

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।