श्री सरस्वती साष्टाङ्ग-प्रणाम मन्त्र

पारंपरिक
महादेव मंत्र Mantra Saraswati Sashtang Pranam Mantra Mantra
॥ पावन पाठ ॥

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।

नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम्॥

तामग्निवर्णां तपसा ज्वलन्तीं वैरोचनीं कर्मफलेषु जुष्टाम्।

दुर्गां देवीगं शरणमहं प्रपद्ये सुतरसि तरसे नमः॥

देवीं वाचमजनयन्त देवास्तां विश्वरूपाः पशवो वदन्ति।

सा नो मन्द्रेषमूर्जं दुहाना धेनुर्वागस्मानुपसुष्टुतैतु॥

कालरात्रिं ब्रह्मस्तुतां वैष्णवीं स्कन्दमातरम्।

सरस्वतीमदितिं दक्षदुहितरं नमामः पावनां शिवाम्॥

॥ दोहा ॥

ॐ भगवत्यै श्रीसरस्वत्यै नमः साष्टाङ्ग-प्रणामं समर्पयामि॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री सरस्वती साष्टाङ्ग-प्रणाम मन्त्र | Read Saraswati Sashtang Pranam Mantra

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।