आरती सरस्वती जी: ओइम् जय वीणे वाली

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती Aarti Maa Saraswati Aarti
॥ पावन पाठ ॥

ओइम् जय वीणे वाली,

मैया जय वीणे वाली

ऋद्धि-सिद्धि की रहती,

हाथ तेरे ताली

ऋषि मुनियों की बुद्धि को,

शुद्ध तू ही करती

स्वर्ण की भाँति शुद्ध,

तू ही माँ करती॥ 1 ॥

ज्ञान पिता को देती,

गगन शब्द से तू

विश्व को उत्पन्न करती,

आदि शक्ति से तू॥ 2 ॥

हंस-वाहिनी दीज,

भिक्षा दर्शन की

मेरे मन में केवल,

इच्छा तेरे दर्शन की॥ 3 ॥

ज्योति जगा कर नित्य,

यह आरती जो गावे

भवसागर के दुख में,

॥ दोहा ॥

गोता न कभी खावे॥ 4 ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।