श्री सरस्वती चालीसा

पारंपरिक स्तुति
माता सरस्वती चालीसा सरस्वती चालीसा
॥ दोहा ॥

जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धारि।
बन्दौ मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥

॥ चौपाई ॥

जय श्री सकल बुद्धि बलरासी। जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी॥
जय जय जय वीणाकर धारी। करत सदा सुहंस सवारी॥

श्वेत वस्त्र सोहत शुचि काया। सब मुनिजन तुम्हरी गुण गाया॥
विद्या बुद्धि विवेक विधाता। ज्ञान की देवी तुम सुखदाता॥

शारद मात कृपा करि दीजै। अज्ञानी को ज्ञानी कीजै॥
कवि कोविद सब तुमको ध्यावें। वेद पुराणन में जस पावें॥

जो जन सरस्वती चालीसा गावे। विद्या बुद्धि परम फल पावे॥
परीक्षा में सब बाधा जाई। मातु शारदा होय सहाई॥

॥ दोहा ॥

मातु भारती की कृपा, रहे सदा अनुकूल।
विद्या विनय विवेक से, खिले ज्ञान का फूल॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

विद्या और संगीत की अधिष्ठात्री देवी माँ शारदा की चालीसा विद्यार्थियों और साधकों को एकाग्रता, मेधा और विवेक प्रदान करती है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।