श्री सरस्वती अष्टकम्

संत सूरदास
माता सरस्वती मंत्र Mantra Maa Saraswati Mantra
॥ दोहा ॥

॥ शतानीक उवाच ॥

॥ चौपाई ॥

महामते महाप्राज्ञसर्वशास्त्रविशारद।

अक्षीणकर्मबन्धस्तुपुरुषो द्विजसत्तम॥1॥

मरणे यज्जोपेज्जाप्यंयं च भावमनुस्मरन्।

परं पदमवाप्नोतितन्मे ब्रूहि महामुने॥2॥

॥ शौनक उवाच ॥

इदमेव महाराजपृष्टवांस्ते पितामहः।

भीष्मं धर्मविदां श्रेष्ठंधर्मपुत्रो युधिष्ठिरः॥3॥

॥ युधिष्ठिर उवाच ॥

पितामह महाप्राज्ञसर्वशास्त्रविशारदः।

बृहस्पतिस्तुता देवीवागीशेन महात्मना।

आत्मायं दर्शयामासंसूर्य कोटिसमप्रभम्॥4॥

॥ सरस्वत्युवाच ॥

वरं वृणीष्व भद्रंते यत्ते मनसि विद्यते।

॥ बृहस्पतिरूवाच ॥

यदि मे वरदा देविदिव्यज्ञानं प्रयच्छ नः॥5॥

॥ देव्युवाच ॥

हन्त ते निर्मलज्ञानंकुमतिध्वंसकारणम्।

स्तोत्रणानेन यो भक्तयामां स्तुवन्ति मनीषिण॥6॥

॥ बृहस्पतिरूवाच ॥

लभते परमं ज्ञानंयतपरैरपि दुर्लभम्।

प्राप्नोति पुरुषो नित्यंमहामाया प्रसादतः॥7॥

॥ सरस्वत्युवाच ॥

त्रिसन्ध्यं प्रयतो नित्यंपठेदष्टकमुत्तमम्।

तस्य कण्ठे सदा वासंकरिष्यामि न संशयः॥8॥

॥ दोहा ॥

॥ इति श्रीपद्मपुराणे सरस्वती अष्टकम् सम्पूर्णम् ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री सरस्वती अष्टकम् | Shri Saraswati Ashtakam

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।