सपने में सखी देख्यो नंदगोपाल

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सपने में सखी देख्यो नन्दगोपाल,

सावली सूरतिया हाथो मे बाँसुरिया,

और घुँघराले बाल,

​सपने मे सखी देख्यो नन्दगोपाल ॥

व्रंदावन री कुंज गलियन मे,

भागतो दौड़तो देख्यो,

देख्यो री सखी भागतो दौड़तो देख्यो,

जंगल बिच मे गाय चरावतो,

बाध्यो कालो शाल,

​सपने मे सखी देख्यो नन्दगोपाल ॥

सपने में सखी देख्यो नन्दगोपाल,

सावली सूरतिया हाथो मे बाँसुरिया,

और घुँघराले बाल,

​सपने मे सखी देख्यो नन्दगोपाल ॥

लुकतो-छुपतो पनघट ऊपर,

सबकी मटकिया फोड़े,

फोड़े रे सखी सबकी मटकिया फोड़े,

घ- घर जावतो माखन चुरावतो,

प्यारो यशोदा रो लाल,

​सपने मे सखी देख्यो नन्दगोपाल ॥

सपने में सखी देख्यो नन्दगोपाल,

सावली सूरतिया हाथो मे बाँसुरिया,

और घुँघराले बाल,

​सपने मे सखी देख्यो नन्दगोपाल ॥

म्हारे सागे नटखट कन्हैया,

लुक मिचणी खेले सखी री,

वो तो लुक मिचणी खेले,

जद मने पकडयो कृष्ण कन्हाई,

मै तो हो गई न्याल,

​सपने मे सखी देख्यो नन्दगोपाल ॥

सपने में सखी देख्यो नन्दगोपाल,

सावली सूरतिया हाथो मे बाँसुरिया,

और घुँघराले बाल,

॥ दोहा ॥

​सपने मे सखी देख्यो नन्दगोपाल ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।