सांवरिया सेठ दे दे सहारा

संजय मित्तल
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॥ दोहा ॥

सेठों के तुम सेठ हो, जग के पालनहार।
जो आवे दरबार में, पावे सुख अपार॥

॥ चौपाई ॥

सांवरिया सेठ दे दे सहारा, तेरे सिवा कौन हमारा।
सांवरिया सेठ दे दे सहारा, तेरे सिवा कौन हमारा॥

तू है लखदाता तू है विधाता, सब जग का तू भाग्य विधाता।
जिस पे तेरी नज़र हो जाए, वो निर्धन भी धनी कहलाए॥
मेरी भी बिगड़ी बात बना दो, बिगड़ा मुकद्दर मेरा जगा दो॥
सांवरिया सेठ दे दे सहारा॥

खाटू में बैठा सेठ हमारा, बाँट रहा है अमृत धारा।
जिसने भी जो माँगा पाया, खाली हाथ कोई ना आया॥
मैं भी आया बनके भिखारी, भर दो झोली हे त्रिपुरारी॥
सांवरिया सेठ दे दे सहारा॥

संजय मित्तल गुणगान करे, तेरे चरणों में ध्यान धरे।
कृपा की छाया मुझ पर रखना, सांवरिया मेरा मान रखना॥
सांवरिया सेठ दे दे सहारा, तेरे सिवा कौन हमारा॥

॥ दोहा ॥

सेठ सांवरो खाटू वालो, मेटे सकल कलेश।
संजय मित्तल शीश नमावे, काटे सब अंदेश॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

बाबा श्याम को 'सांवरिया सेठ' यानी पूरे संसार के सबसे बड़े दाता मानकर उनसे कृपा, सहायता और जीवन संवारने की प्रार्थना की गई है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।