सांवरे तेरे भरोसे मेरी नैया चल रही

कन्हैया मित्तल
अन्य भजन भजन कन्हैया मित्तल
॥ दोहा ॥

नैया पुरानी धार नई, तू ही मेरा खिवैया।
पार लगा दो सांवरे, हे खाटू के कन्हैया॥

॥ चौपाई ॥

सांवरे तेरे भरोसे मेरी नैया चल रही, नैया चल रही मेरी नाव बढ़ रही।
तू जो बन गया माझी, मंजिल भी मिल रही॥
सांवरे तेरे भरोसे मेरी नैया चल रही॥

तूफ़ानों से घिरी थी जब जीवन की ये डगर।
कोई किनारा ना दिखता था दूर दूर तक नज़र॥
तूने ही थामा पतवार, विपदा सब टल रही।
सांवरे तेरे भरोसे मेरी नैया चल रही॥

दुनिया ने साथ छोड़ा तो तूने गले लगाया।
मुझ दीन हीन को भी, अपना दास बनाया॥
तेरी दया की छाँव में, बगिया ये खिल रही।
सांवरे तेरे भरोसे मेरी नैया चल रही॥

कन्हैया मित्तल गाए गीत, खाटू के सांवरिया का।
सदा बना रहे प्यार हमारे, बाबा के आशियाने का॥
सांवरे तेरे भरोसे मेरी नैया चल रही॥

॥ दोहा ॥

श्याम कृपा की नाव पर, बैठे जो निष्काम।
कन्हैया मित्तल भव तरे, जय जय श्री परशुराम॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

बाबा श्याम के भरोसे जीवन की नैया सुरक्षित और निर्बाध रूप से गतिमान रहने का कृतज्ञता भरा भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।