॥ दोहा ॥
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया।
दिल दीवाना हो गया, दिल दीवाना हो गया॥
॥ चौपाई ॥
एक तो तेरे नैन तिरछे, दूसरा कजरा लगा।
तीसरा नज़रे मिलाना, दिल दीवाना हो गया॥
सांवली सूरत पे...
एक तो तेरे होंठ पतले, दूसरा लाली लगी।
तीसरा बंसी बजाना, दिल दीवाना हो गया॥
सांवली सूरत पे...
एक तो तेरे हाथ कोमल, दूसरा कंगन सजे।
तीसरा माखन चुराना, दिल दीवाना हो गया॥
सांवली सूरत पे...
एक तो तेरे पाँव पैजन, दूसरा घुँघरू बंधे।
तीसरा ठुमक चलना, दिल दीवाना हो गया॥
सांवली सूरत पे...
॥ दोहा ॥
श्री राधा रमण गिरधारी, जय जय बांके बिहारी।
दिल दीवाना हो गया, बलिहारी बलिहारी॥