साँसों की माला पे सिमरूं मैं, पी का नाम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

साँसों की माला पे सिमरूं मैं, पी का नाम,

अपने मन की मैं जानूँ, और पी के मन की राम,

साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,

अपने मन की मैं जानूँ और पी के मन की राम,

साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,

साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥

जीवन का श्रृंगार है प्रीतम, माँग का सिन्दूर,

माँग का सिन्दूर,

जीवन का श्रृंगार है प्रीतम, माँग का सिन्दूर,

प्रीतम की नज़रों से गिरकर, जीना है किस काम,

प्रीतम की नज़रों से गिरकर, जीना है किस काम,

साँसों की, साँसों की,

साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,

साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥

प्रेम के रंग में ऐसी डूबी, बन गया एक ही रूप,

बन गया एक ही रूप,

प्रेम के रंग में ऐसी डूबी, बन गया एक ही रूप,

प्रेम की माला जपते जपते, आप बनी मैं श्याम,

प्रेम की माला जपते जपते, आप बनी मैं श्याम,

साँसों की, साँसों की,

साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,

साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥

प्रीतम का कुछ दोष नहीं है वो तो है निर्दोष,

वो तो है निर्दोष,

अपने आप से बातें कर के, हो गयी मैं बदनाम,

अपने आप से बातें कर के, हो गयी मैं बदनाम,

साँसों की, साँसों की,

साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,

साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥

प्रेम पियाला जब से पिया है, जी का है ये हाल,

जी का है ये हाल,

प्रेम पियाला जब से पिया है, जी का है ये हाल,

अंगारों पे नींद आ जाए, काँटों पे आराम,

अंगारों पे नींद आ जाए, काँटों पे आराम,

साँसों की, साँसों की,

साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,

साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥

अपने मन की मैं जानूँ, और पी के मन की राम,

साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,

अपने मन की मैं जानूँ और पी के मन की राम,

साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,

॥ दोहा ॥

साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।