कपीश्वर महाबली - असुर संहारक रूप स्तुति

पारंपरिक भजन
हनुमान जी भजन भजन हनुमान जी
॥ दोहा ॥

जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ।
मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ॥

॥ चौपाई ॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाय राजपद दीन्हा।
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना, लंकेश्वर भए सब जग जाना॥
प्रभु के काज सँवारे सारे, भक्तन के रखवारे।
दीनबंधु दया करो अब, जय जय पवनकुमारे॥

हरि के चरणन में सुख भारी, जहाँ बिराजे करुणा सारी।
भव के सागर तर जावेगा, सुमिरन कर ले बनवारी॥

भूत पिशाच निकट नहिं आवे, महावीर जब नाम सुनावै।
नाशै रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।
सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा॥

॥ दोहा ॥

हरि ॐ तत्सत् नारायण, वासुदेव सुख रास।
जो यह पद निशदिन सुने, पूरे मन की आस॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

यह पारंपरिक भक्ति भजन प्राचीन संत परंपरा का पावन संकलन है, जो मन को एकाग्र कर ईश्वर के शरणागत होने की प्रेरणा देता है। इस पावन भजन में हनुमान जी के राम भक्त शिरोमणि स्वरूप की स्तुति करते हुए साधक को अंतःकरण के विकारों से मुक्त होकर सच्चे आनंद की प्राप्ति का मार्ग दिखाया गया है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।