दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, दुःख काहे को hoy॥
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।
वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपिसूर॥
हाथ गदा और ध्वजा विराजे, कांधे मूंज जनेऊ।
राम काज करिबे को आतुर, सब संकट हरि लेऊ॥
प्रभु जी तुम चंदन हम पानी, जाकी अंग अंग बास समानी।
तुम घन बन हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाय राजपद दीन्हा।
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना, लंकेश्वर भए सब जग जाना॥
प्रभु के काज सँवारे सारे, भक्तन के रखवारे।
दीनबंधु दया करो अब, जय जय पवनकुमारे॥
कहे रविदास खलास चमारा, जो परसै हरि चरण।
जाके घट में प्रेम बसे है, ताको प्रभु की शरण॥