संकट हरनी मंगल करनी, कर दो बेडा पार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

संकट हरनी मंगल करनी,

कर दो बेडा पार,

भरोसा भारी है,

भारी है माँ भारी है,

तुझपे भरोसा भारी है,

जय जगदम्बे शेरावाली,

हे दुर्गे अवतार,

भरोसा भारी है,

संकट हरणी मंगल करणी,

कर दो बेडा पार,

भरोसा भारी है ॥

लक्ष्मी शारदा काली तू,

करने मर्दन वाली तू,

भक्तो की प्रतिपाली तू,

मैया शेरावाली तू,

कर रक्षा अपने भक्तो की,

होकर सिंह सवार,

भरोसा भारी है,

संकट हरणी मंगल करणी,

कर दो बेडा पार,

भरोसा भारी है ॥

बीच भवर में नाव पड़ी,

तुझ बिन मैया कोई नहीं,

डोल रही है नाव मेरी,

पार करेगी माँ तू ही,

छोड़ तुझे अब जाऊं कहाँ मैं,

दिखे ना दूजा द्वार,

भरोसा भारी है,

संकट हरणी मंगल करणी,

कर दो बेडा पार,

भरोसा भारी है ॥

माँ की शक्ति भारी है,

माँ की ज्योत निराली है,

माँ की ममता की महिमा,

वेद पुराण बखानी है,

जनम लिया पर मिला नहीं माँ,

तेरा सच्चा प्यार,

भरोसा भारी है,

संकट हरणी मंगल करणी,

कर दो बेडा पार,

भरोसा भारी है ॥

भाव सागर का पार नहीं,

नैया में पतवार नहीं,

सुनले करुण पुकार मेरी,

तेरे बिन आधार नहीं,

‘राधे’ पर कर दया मेहर की,

एक बार पलक उघाड़,

भरोसा भारी है,

संकट हरणी मंगल करणी,

कर दो बेडा पार,

भरोसा भारी है ॥

संकट हरनी मंगल करनी,

कर दो बेडा पार,

भरोसा भारी है,

भारी है माँ भारी है,

तुझपे भरोसा भारी है,

जय जगदम्बे शेरावाली,

हे दुर्गे अवतार,

भरोसा भारी है,

संकट हरणी मंगल करणी,

कर दो बेडा पार,

भरोसा भारी है ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।