शनिवार को कष्ट कटे, मंगल हो मंगलवार

पारंपरिक
हनुमान जी भजन Bhajan Hanuman Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

आ जाओ और किरपा पा लो,

हफ्ते में दो बार,

मेरे बजरंगी के द्वार,

मेरे बजरंगी के द्वार,

शनिवार को कष्ट कटे,

मंगल हो मंगलवार,

मेरे बजरंगी के द्वार,

मेरे बजरंगी के द्वार ॥

झूठे रिश्ते झूठे नाते,

झूठी दुनियादारी,

सुख के साथी सब है,

दुःख में ना कोई भागीदारी,

ऐसे वक़्त में मिल जाता है,

जीवन को आधार,

मेरे बजरंगी के द्वार,

मेरे बजरंगी के द्वार ॥

माया आनी जानी है,

तेरे साथ में कुछ ना जाए,

बजरंगी जो कृपा करें,

तेरी कश्ती पार लगाएं,

छोड़ दे सारी चिंता प्यारे,

चिंता है बेकार,

मेरे बजरंगी के द्वार,

मेरे बजरंगी के द्वार ॥

नाम है प्यारा बजरंगी का,

जनम सुधारे तेरा,

सुबह शाम तू रट ले प्यारे,

जब जब दुःख ने घेरा,

‘मीतू’ ने जो सपने देखे,

हो गए वो साकार,

मेरे बजरंगी के द्वार,

मेरे बजरंगी के द्वार ॥

आ जाओ और किरपा पा लो,

हफ्ते में दो बार,

मेरे बजरंगी के द्वार,

मेरे बजरंगी के द्वार,

शनिवार को कष्ट कटे,

मंगल हो मंगलवार,

मेरे बजरंगी के द्वार,

॥ दोहा ॥

मेरे बजरंगी के द्वार ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।