सालासर में जिसका, आना जाना हो गया

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Hanuman Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सालासर में जिसका,

आना जाना हो गया,

वो ही मेरी बाबा का,

दीवाना हो गया,

वो ही मेरी बाबा का,

दीवाना हो गया ॥

जा के दरबार में,

जो शीश झुकाते हैं,

बालाजी दयालु उन्हें,

गले से लगाते हैं,

जिसका मेरे बाबा से,

याराना हो गया,

वो ही मेरी बाबा का,

दीवाना हो गया,

वो ही मेरी बाबा का,

दीवाना हो गया ॥

प्यार का खजाना,

बालाजी का भरपूर है,

प्रेम को लुटाने में,

ये बड़े मशहूर है,

जो भी इनसे जाना,

पहचाना हो गया,

वो ही मेरी बाबा का,

दीवाना हो गया,

वो ही मेरी बाबा का,

दीवाना हो गया ॥

बाबा के दीवाने की तो,

बात निराली है,

बाबा की कृपा से,

मोहन मुरली की दीवानी है,

जिनका उनके चरणों में,

ठिकाना हो गया,

वो ही मेरी बाबा का,

दीवाना हो गया,

वो ही मेरी बाबा का,

दीवाना हो गया ॥

सालासर में जिसका,

आना जाना हो गया,

वो ही मेरी बाबा का,

दीवाना हो गया,

वो ही मेरी बाबा का,

॥ दोहा ॥

दीवाना हो गया ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।