सलाह नहीं, साथ चाहिए - प्रेरक कहानी

पारंपरिक
विष्णु भगवान कथा Prerak-kahani Bird Prerak-kahani
॥ पावन पाठ ॥

एक बार एक पक्षी समुंदर में से चोंच से पानी बाहर निकाल रहा था।

दूसरे ने पूछा: भाई ये क्या कर रहा है।

पहला बोला: समुंदर ने मेरे बच्चे डूबा दिए है अब तो इसे सूखा कर ही रहूँगा।

यह सुन दूसरा बोला: भाई तेरे से क्या समुंदर सूखेगा। तू छोटा सा और समुंदर इतना विशाल। तेरा पूरा जीवन लग जायेगा।

पहला बोला: देना है तो साथ दे। सिर्फ़ सलाह नहीं चाहिए।

यह सुन दूसरा पक्षी भी साथ लग लिया। ऐसे हज़ारों पक्षी आते गए और दूसरे को कहते गए सलाह नहीं साथ चाहिए।

यह देख भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ जी भी इस काम के लिए जाने लगे। भगवान बोले तुम कहाँ जा रहे हो? तुम गये तो मेरा काम रुक जाएगा। तुम पक्षियों से समुंदर सूखना भी नहीं है।

गरुड़ बोले: भगवन सलाह नहीं साथ चाहिए।

फिर क्या ऐसा सुन भगवान विष्णु जी भी समुंदर सुखाने आ गये। भगवान जी के आते ही समुंदर डर गया और उस पक्षी के बच्चे लौटा दिए।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

प्रेरक कहानीसलाह नहीं साथ चाहिए | Salah Nahi Sath Chahiye | Not recommended Need Help | unity is strength | एक और एक ग्यारह

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।