सजेगा जब खाटू वाले का दरबार

कन्हैया मित्तल
अन्य भजन भजन कन्हैया मित्तल
॥ दोहा ॥

सजा दरबार सांवरिया का, महक उठा संसार।
दर्शन पाकर धन्य हुए, भक्त शरण इस बार॥

॥ चौपाई ॥

सजेगा जब खाटू वाले का दरबार, नाचेगा सारा संसार।
आएंगे नीले घोड़े पर सवार, मेरे खाटू के सरकार॥
सजेगा जब खाटू वाले का दरबार॥

रंग बिरंगे फूलों से, बाबा का भवन सजेगा।
इत्र की खुशबू से सारा, ये खाटू धाम महकेगा॥
अखंड जोत जलेगी प्यारे, मिट जाएगा अंधकार।
सजेगा जब खाटू वाले का दरबार॥

छप्पन भोग लगेंगे बाबा, खीर चूरमा का थाल।
मोरछड़ी लहराएंगे जब, मेरे सांवरिया लाल॥
झूम उठेंगे भक्त सभी, गूँजेगा जय जयकार।
सजेगा जब खाटू वाले का दरबार॥

कन्हैया मित्तल गाए बधाई, खाटू नगरी आई।
सारे भक्तों की झोली में, खुशियाँ ही खुशियाँ छाई॥
सजेगा जब खाटू वाले का दरबार, नाचेगा सारा संसार॥

॥ दोहा ॥

खाटू दरबार की महिमा, कहे न कोई पार।
कन्हैया मित्तल शीश धरे, जय जय लखदातार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

खाटू श्याम जी के भव्य कीर्तन दरबार, फूलों की सजावट, अखंड ज्योति और छप्पन भोग के आनंदोत्सव का मनमोहक भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।