सजा दो घर को गुलशन सा मेरे सरकार आए हैं

देवी चित्रलेखा
श्री राम भजन भजन देवी चित्रलेखा
॥ दोहा ॥

अवधपुरी अति शोभित, पधारे रघुकुल भूप।
देवी चित्रलेखा गावती, राम मनोहर रूप॥

॥ चौपाई ॥

सजा दो घर को गुलशन सा, मेरे सरकार आए हैं।
लगे कुटिया भी दुल्हन सी, अवध में राम आए हैं॥
सजा दो घर को गुलशन सा॥

पखारो इनके चरणों को, बहाकर प्रेम की गंगा।
बिछा दो अपनी पलकों को, मेरे भगवान आए हैं॥
सजा दो घर को गुलशन सा॥

उमड़ आई मेरी आंखें, देख कर अपने राघव को।
हुई धन्य मेरी कुटिया, मेरे श्री राम आए हैं॥
सजा दो घर को गुलशन सा॥

देवी चित्रलेखा गावे हर्षित, राम लखन संग सीता मैया।
भक्ति की इस पावन ज्योति से, जगमग है अवध नगरिया॥
चरणों में शीश झुकाओ, मेरे सरकार आए हैं।
सजा दो घर को गुलशन सा, मेरे सरकार आए हैं॥

॥ दोहा ॥

मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी।
देवी चित्रलेखा वंदन करे, जय जय अवध बिहारी॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

प्रभु श्री राम के अवध में आगमन पर घर-आँगन सजाने और पावन चरण पखारने का अति लोकप्रिय भावपूर्ण संकीर्तन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।