सजा दो घर को गुलशन सा अवध में राम आए हैं

शैली / पारंपरिक राम भजन
श्री राम भजन भजन राम
॥ दोहा ॥

सजा दो घर को गुलशन सा, अवध में राम आए हैं।
लगे कुटिया भी दुल्हन सी, अवध में राम आए हैं॥

॥ चौपाई ॥

पखारो इनके चरणों को बहाकर प्रेम की गंगा।
बिछा दो अपनी पलकों को, अवध में राम आए हैं॥
सजा दो घर को गुलशन सा...

उमड़ आई मेरी आँखें देख रघुवर की छवि सुंदर।
हुई धन्य मेरी अखियां, अवध में राम आए हैं॥
सजा दो घर को गुलशन सा...

सजा दो थाल आरती का, जला लो दीप खुशियों के।
मिटे सब कष्ट जीवन के, अवध में राम आए हैं॥
सजा दो घर को गुलशन सा...

॥ दोहा ॥

राम सिया राम, सिया राम जय जय राम।
अवधपुरी प्रभु आवत जानी, भई सकल सोभामृत खानी॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भगवान श्री राम के अवध आगमन के उल्लास, प्रेम और गृह-मंदिर की सज्जा का परम आनंददायक और भक्तिमय गान।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।