॥ दोहा ॥
सजा दो घर को गुलशन सा, अवध में राम आए हैं।
लगे कुटिया भी दुल्हन सी, अवध में राम आए हैं॥
॥ चौपाई ॥
पखारो इनके चरणों को बहाकर प्रेम की गंगा।
बिछा दो अपनी पलकों को, अवध में राम आए हैं॥
सजा दो घर को गुलशन सा...
उमड़ आई मेरी आँखें देख रघुवर की छवि सुंदर।
हुई धन्य मेरी अखियां, अवध में राम आए हैं॥
सजा दो घर को गुलशन सा...
सजा दो थाल आरती का, जला लो दीप खुशियों के।
मिटे सब कष्ट जीवन के, अवध में राम आए हैं॥
सजा दो घर को गुलशन सा...
॥ दोहा ॥
राम सिया राम, सिया राम जय जय राम।
अवधपुरी प्रभु आवत जानी, भई सकल सोभामृत खानी॥