सज धज के बैठी है माँ, लागे सेठानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Mata Rani Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सज धज के बैठी है माँ,

लागे सेठानी,

लागे सेठानी ओ मेरी माँ,

लागे सेठानी,

सज धज के बैठी है मां,

लागे सेठानी ॥

किसने मैया जी तेरी चुनरी बनाई,

किसने मैया जी तेरी चुनरी बनाई,

चुनरी बनाई तेरे सिर पे सजाई,

चुनरी में तार हजार,

लागे सेठानी,

सज धज के बैठी है मां,

लागे सेठानी ॥

किसने मैया जी तेरी पायल बनाई,

किसने मैया जी तेरी पायल बनाई,

पायल बनाई तेरे पैरो में पहनाई,

पायल में घुंघरू हजार,

लागे सेठानी,

सज धज के बैठी है मां,

लागे सेठानी ॥

किन किन हाथों में मैया मेहंदी लगाऊं,

किन किन हाथों में मैया मेहंदी लगाऊं,

मेहंदी लगाऊं तेरे हाथों में रचाऊं,

मैया जी के हाथ है हजार,

लागे सेठानी,

सज धज के बैठी है मां,

लागे सेठानी ॥

मेरी माता के नवराते है आए,

मेरी मैया के नवराते है आए,

सब मिलकर माँ की ज्योति जगाए,

‘रवि’ लगाए जय जयकार,

लागे सेठानी,

सज धज के बैठी है मां,

लागे सेठानी ॥

सज धज के बैठी है माँ,

लागे सेठानी,

लागे सेठानी ओ मेरी माँ,

लागे सेठानी,

सज धज के बैठी है मां,

लागे सेठानी ॥

दुर्गा चालीसा | आरती: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी | आरती: अम्बे तू है जगदम्बे काली | महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् | माता के भजन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।