सजधज कर जिस दिन, मौत की शहजादी आएगी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

सजधज कर जिस दिन,

मौत की शहजादी आएगी,

ना सोना काम आएगा,

ना चांदी आएगी,

ना सोना काम आएगा,

ना चांदी आएगी ॥

छोटा सा तू,

कितने बड़े अरमान हैं तेरे,

मिट्टी का तु,

सोने के सामान हैं तेरे,

मिट्टी की काया मिट्टी में,

जिस दिन समाएगी,

ना सोना काम आएगा,

ना चांदी आएगी ॥

पर खोल ले तू पंछी,

पिंजरा तोड़ के उड़ जा,

माया महल के सारे,

बंधन छोड़ के उड़ जा,

धड़कन में जिस दिन,

मौत तेरी गुनगुनायेगी,

ना सोना काम आएगा,

ना चांदी आएगी ॥

अच्छे किए तूने करम,

तो पाया मानुष तन,

और पाप की क्यों भटका,

है ये पापी तेरा मन,

ये पाप की नैया तुझको,

एक दिन डुबाएगी,

ना सोना काम आएगा,

ना चांदी आएगी ॥

जैसा किया है तुने,

तेरे साथ जायेगा,

बोये है काँटे तूने,

कैसे फूल पायेगा,

ये पाप कि गठरी,

तुझे एक दिन डुबायेगी,

ना सोना काम आएगा,

ना चांदी आएगी ॥

भाई भतीजे बन्धू सब,

मतलब के है सारे,

कोइ नही कुछ काम,

तेरे आएँगे प्यारे,

करनी हि तेरी बावरे,

संग तेरे जाएगी,

ना सोना काम आएगा,

ना चांदी आएगी ॥

सजधज कर जिस दिन,

मौत की शहजादी आएगी,

ना सोना काम आएगा,

ना चांदी आएगी,

ना सोना काम आएगा,

॥ दोहा ॥

ना चांदी आएगी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।