सदाशिव सर्व वरदाता, दिगम्बर हो तो ऐसा हो

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सदाशिव सर्व वरदाता,

दिगम्बर हो तो ऐसा हो ।

हरे सब दुःख भक्तों के,

दयाकर हो तो ऐसा हो ॥

शिखर कैलाश के ऊपर,

कल्पतरुओं की छाया में ।

रमे नित संग गिरिजा के,

रमणधर हो तो ऐसा हो ॥

सदाशिव सर्व वरदाता,

दिगम्बर हो तो ऐसा हो ।

शीश पर गंग की धारा,

सुहाए भाल पर लोचन ।

कला मस्तक पे चन्दा की,

मनोहर हो तो ऐसा हो ॥

सदाशिव सर्व वरदाता,

दिगम्बर हो तो ऐसा हो ।

भयंकर जहर जब निकला,

क्षीरसागर के मंथन से ।

रखा सब कण्ठ में पीकर,

कि विषधर हो तो ऐसा हो ॥

सदाशिव सर्व वरदाता,

दिगम्बर हो तो ऐसा हो ।

सिरों को काटकर अपने,

किया जब होम रावण ने ।

दिया सब राज दुनियाँ का,

दिलावर हो तो ऐसा हो ॥

सदाशिव सर्व वरदाता,

दिगम्बर हो तो ऐसा हो ।

बनाए बीच सागर के,

तीन पुर दैत्य सेना ने ।

उड़ाए एक ही शर से,

त्रिपुरहर हो तो ऐसा हो ॥

सदाशिव सर्व वरदाता,

दिगम्बर हो तो ऐसा हो ।

देवगण दैत्य नर सारे,

जपें नित नाम शंकर जो,

वो ब्रह्मानन्द दुनियाँ में,

उजागर हो तो ऐसा हो ॥

सदाशिव सर्व वरदाता,

दिगम्बर हो तो ऐसा हो ।

हरे सब दुःख भक्तों के,

॥ दोहा ॥

दयाकर हो तो ऐसा हो ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।