सदा साफ़ रखना तू बन्दे, मन का शिवाला

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सदा साफ़ रखना तू बन्दे,

मन का शिवाला,

ना जाने कब कर दे दया,

श्रष्टि रचने वाला,

सदा साफ़ रखना तू बन्दें,

मन का शिवाला ॥

या धनवान हो या निर्धन हो,

सबपे कृपा बराबर तेरी,

या धनवान हो या निर्धन हो,

सबपे कृपा बराबर तेरी,

सबको कर्मो का फल देता,

सोच के देने वाला,

सदा साफ़ रखना तू बन्दें,

मन का शिवाला ॥

जब माया में भटक के कोई,

तन मन धन खो देता है,

जब माया में भटक के कोई,

तन मन धन खो देता है,

जो प्रभु का सुमिरण करता है,

वो है किस्मत वाला,

सदा साफ़ रखना तू बन्दें,

मन का शिवाला ॥

जो जाए दरबार में उनके,

वो झोली भर देता है,

जो जाए दरबार में उनके,

वो झोली भर देता है,

देने में सबसे आगे है,

शिव शंकर मतवाला,

सदा साफ़ रखना तू बन्दें,

मन का शिवाला ॥

सदा साफ़ रखना तू बन्दे,

मन का शिवाला,

ना जाने कब कर दे दया,

श्रष्टि रचने वाला,

सदा साफ़ रखना तू बन्दें,

॥ दोहा ॥

मन का शिवाला ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।