सांवरे सलोने मेरे गिरधारी

इंद्रेश जी महाराज
श्री कृष्ण भजन भजन इंद्रेश जी महाराज
॥ दोहा ॥

सांवरी मूरत मोहन की, मन मंदिर में साजे।
इंद्रेश बंशी की धुन पे, रोम रोम रस बाजे॥

॥ चौपाई ॥

सांवरे सलोने मेरे गिरधारी।
तेरी मंद मंद मुसकान पे मैं बलिहारी॥
सांवरे सलोने मेरे गिरधारी॥

मोर मुकुट पीतांबर सोहे।
बंशी की धुन त्रिभुवन मोहे॥
यमुना तट पे गौएं चरावे, बांके कुंजबिहारी।
सांवरे सलोने मेरे गिरधारी॥

तेरे नैनन में जादू भरियो।
चितचोर तूने मेरो मन हरिओ॥
तेरे दर की बन के दासी, खड़ी हूँ बनवारी।
सांवरे सलोने मेरे गिरधारी॥

इंद्रेश कहे ओ नंदनंदन।
करूँ मैं तेरा नित्य ही वंदन॥
अपने चरणों में स्थान दे, हे गोवर्धन धारी।
सांवरे सलोने मेरे गिरधारी॥

॥ दोहा ॥

गिरधारी गोपाल प्रभु, भक्तन के आधार।
इंद्रेश शरण में आ पड़ा, जय जय नन्दकुमार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री कृष्ण के सांवले रूप, मंद मुस्कान और गोवर्धन लीला की महिमा का स्तुति गान।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।