॥ दोहा ॥
दिल के मंदिर में बिठा, सांवरिया सुकुमार।
पूजा सखी रस में डूबे, पावे सुख अपार॥
॥ चौपाई ॥
साँवरे को दिल में बसा कर तो देखो।
दुनिया से मन को हटा कर तो देखो॥
साँवरे को दिल में बसा कर तो देखो॥
एक बार मोहन से नेह लगाओ।
सच्चे हृदय से शरण में आओ॥
सारे बंधनों को मिटा कर तो देखो।
साँवरे को दिल में बसा कर तो देखो॥
वो तो दयालु है करुणा निधान है।
भक्तों के संकट हरने में महान है॥
अपनी व्यथा उसे सुना कर तो देखो।
साँवरे को दिल में बसा कर तो देखो॥
पूजा सखी कहे प्रेम का दीप जलाओ।
राधा रमन को हृदय में बुलाओ॥
जीवन का सुख तुम पा कर तो देखो।
साँवरे को दिल में बसा कर तो देखो॥
॥ दोहा ॥
सांवरिया जब हिय बसे, मिटे सकल अज्ञान।
पूजा सखी बलिहारी जावे, पावे पद निर्वान॥