॥ दोहा ॥
गिरधर गोपाल छबि अति प्यारी, त्रिभुवन पति मनहारी।
साध्वी पूर्णिमा गावे महिमा, बलिहारी बलिहारी॥
॥ चौपाई ॥
सांवरे सलोने मेरे गिरधर गोपाल, सुनों मेरी अरज गरीब नवाज।
तूने लाखों तारे कन्हैया, मेरी भी रख लो लाज॥
तेरे दरश का प्यासा मनवा, कब आओगे गोपाल।
सांवरे सलोने मेरे गिरधर गोपाल॥
॥ दोहा ॥
गोपाल कृष्ण कन्हैया मेरे, भवजल पार लगाओ।
साध्वी पूनम की कुटिया में, मुरली मधुर बजाओ॥