सांवरे सलोने मेरे गिरधर गोपाल

साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण भजन भजन साध्वी पूर्णिमा
॥ दोहा ॥

गिरधर गोपाल छबि अति प्यारी, त्रिभुवन पति मनहारी।
साध्वी पूर्णिमा गावे महिमा, बलिहारी बलिहारी॥

॥ चौपाई ॥

सांवरे सलोने मेरे गिरधर गोपाल, सुनों मेरी अरज गरीब नवाज।
तूने लाखों तारे कन्हैया, मेरी भी रख लो लाज॥

तेरे दरश का प्यासा मनवा, कब आओगे गोपाल।
सांवरे सलोने मेरे गिरधर गोपाल॥

॥ दोहा ॥

गोपाल कृष्ण कन्हैया मेरे, भवजल पार लगाओ।
साध्वी पूनम की कुटिया में, मुरली मधुर बजाओ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

गिरधर गोपाल के चरणों में गरीब नवाज प्रभु से अपनी लाज बचाने और जीवन नैया को पार लगाने की भावपूर्ण प्रार्थना।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।