सांवरे को दिल में बसा कर तो देखो

साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण भजन भजन साध्वी पूर्णिमा
॥ दोहा ॥

सांवरे की सूरत बड़ी मनभावनी।
नैनन में बस जाए तो मिटे दुख की रजनी॥

॥ चौपाई ॥

सांवरे को दिल में बसा कर तो देखो, दुनिया से मन को हटा कर तो देखो।
बड़ा ही दयालु है बांके बिहारी, इक बार दामन फैला कर तो देखो॥

वो रोते हुओं को हंसाने लगा है, वो गिरतों को सीने लगाने लगा है।
सच्चे हृदय से पुकारो कन्हैया, वो दौड़ा चला आने लगा है॥

सांवरे को दिल में बसा कर तो देखो, दुनिया से मन को हटा कर तो देखो॥

॥ दोहा ॥

प्रेम भाव से जो भजे, पावे मोहन मीत।
साध्वी पूनम गावती, निर्मल पावन गीत॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

सांसारिक मोह छोड़कर एक बार सच्चे हृदय से कन्हैया को अपने दिल में बसाने और उनकी असीम करुणा का अनुभव करने का प्रेरक भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।