सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया

मृदुल कृष्ण शास्त्री
श्री कृष्ण भजन भजन मृदुल कृष्ण शास्त्री
॥ दोहा ॥

सांवरी सलोनी मूरत, मन में बसी अपार।
मृदुल कृष्ण वारे सदा, कोटि मदन बलिहार॥

॥ चौपाई ॥

सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया।
दिल दीवाना हो गया, दिल दीवाना हो गया॥
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया॥

एक तो तेरे नैन तिरछे, दूसरा कजरा लगा।
तीसरा नज़रे मिलाना, दिल दीवाना हो गया॥
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया॥

एक तो तेरे होंठ पतले, दूसरा लाली लगी।
तीसरा मुरली बजाना, दिल दीवाना हो गया॥
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया॥

एक तो तेरे हाथ कोमल, दूसरा कंगन बंधा।
तीसरा माखन चुराना, दिल दीवाना हो गया॥
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया॥

मृदुल कृष्ण कहे कन्हैया, रूप अनुपम है तेरा।
देख के छवि तेरी मोहन, मिट गया मन का अंधेरा॥
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया॥

॥ दोहा ॥

मोहन मूरत सांवरी, नैनन बसी सुजान।
मृदुल कृष्ण बलिहारी जावे, जय जय श्री भगवान॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्यामसुंदर के नैन, अधर, बंशी और सांवले सलोने रूप के प्रति दीवानगी और अनन्य आकर्षण का रसमयी भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।