सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया

देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण भजन भजन देवी चित्रलेखा
॥ दोहा ॥

सांवली मूरत मोहिनी, मन में बसी सुजान।
देवी चित्रलेखा वारणे, पावे प्रेम विहान॥

॥ चौपाई ॥

सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया।
दिल दीवाना हो गया, मन मस्ताना हो गया॥
सांवली सूरत पे मोहन॥

एक तो तेरे नैन कजरारे, दूजा मुकुट सलोना है।
तीजा होठों पे मुस्कान, सारा ब्रज का खिलौना है॥
देखते ही देखते मैं तो बेगाना हो गया।
सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया॥

कानन कुंडल झलके ऐसे, जैसे बिजली चमके।
टेढ़ी चाल चले नटवर जब, पायलिया छमके॥
तेरी मुरलिया की तान पे, मस्ताना हो गया।
सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया॥

देवी चित्रलेखा गावे श्याम, मैं तो तेरी हो गई।
राधा रानी की कृपा से, तेरी शरण में खो गई॥
चरणों में तेरे मेरा, ठिकाना हो गया।
सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया॥

॥ दोहा ॥

मोहन मूरत सांवरी, काटे सकल कलेश।
देवी चित्रलेखा शीश धरे, जय जय कृष्ण परेश॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री कृष्ण के सांवले सलोने रूप, मुकुट, कुंडल और अधरों की मधुर मुस्कान पर मन के न्योछावर होने का रससिक्त भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।