रूपंग देहि जयम देहि

पारंपरिक
श्री राम मंत्र Mantra Rupang Dehi Jayam Dehi Mantra
॥ पावन पाठ ॥

मधु-कैटभ-विध्वमसि

विधात्री-वरदे नमः

रूपं देहि जयं देहि

यशो देहि दविसो जाहि

महिषासुर-निर्णशी

भक्तानाम सुखदे नमः

रूपं देहि जयं देहि

यशो देहि दविसो जाहि

धूम्रनेत्र-वधे देवी

धर्म-काम-अर्थ-दायिनी

रूपं देहि जयं देहि

यशो देहि दविसो जाहि

रक्तबीजा-वधे देवी

चन्नददा-मुनददा-विनाशिनी

रूपं देहि जयं देहि

यशो देहि दविसो जाहि

निशुम्भ-शुम्भ-निर्णशी

त्रैलोक्य-शुभदे नमः

रूपं देहि जयं देहि

यशो देहि दविसो जाहि

वंदितम्-अंगघृ-युगे देवी

सर्व-सौभाग्य-दायिनी

रूपं देहि जयं देहि

यशो देहि दविसो जाहि

अचिन्त्य-रूप-चरित्र

सर्व-शत्रु-विनाशिनी

रूपं देहि जयं देहि

यशो देहि दविसो जाहि

नतेभ्यः सर्वदा भक्त्याः

का-अपर्णे दुरिता-अपाहे

रूपं देहि जयं देहि

यशो देहि दविसो जाहि

स्तुवद्भयो भक्ति-पूर्वम्

त्वं चण्डदिके व्याधि-नाशिनि

रूपं देहि जयं देहि

यशो देहि दविसो जाहि

चन्नंददिके सततं युद्धे

जयन्ती पापा-नाशिनी

रूपं देहि जयं देहि

यशो देहि दविसो जाहि ॥

देहि सौभाग्यम्-आरोग्यम्

देहि देवि परमं सुखम्

रूपं देहि जयं देहि

यशो देहि दविसो जाहि

विधेहि देवि कल्याणम्

विधेहि विपुलम् श्रीयम्

रूपं देहि जयं देहि

यशो देहि दविसो जाहि

संतो की वाणी विधेहि द्विस्सताम् नाशम्

विदेहि बलम्-उक्काकैः

रूपं देहि जयं देहि

यशो देहि दविसो जाहि

सुरा-असुर-शिरो-रत्न

निघ्रस्सत्ता-चारन्ने-[A]मबुजे

रूपं देहि जयं देहि

यशो देहि दविसो जाहि

विद्यावन्तं यशस्वन्तम्

लक्ष्मिवन्तं च माम् कुरु

रूपं देहि जयं देहि

यशो देहि दविसो जाहि

देवी प्रचन्नददा-दोरदन्नददा

दैत्य-दर्प-निस्सुउदिनी

रूपं देहि जयं देहि

यशो देहि दविसो जाहि ॥

गायक – पंडित तुषार दत्ता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।