नैनन जल की धार बहे, हृदय विरह की पीर।
दरस दिखाओ सांवरे, बाँधो मन को धीर॥
रो रो के पुकारे दिल मेरा खाटू वाले, आ जाओ अब तो सांवरिया।
कब तक तरसाओगे हमको, आ जाओ अब तो सांवरिया॥
रो रो के पुकारे दिल मेरा खाटू वाले॥
तेरे बिना ये जीवन सूना, जैसे बिन पानी की नदिया।
तेरे दर्शन की प्यासी आँखें, रोती हैं ये अँखियां॥
इक बार गले से लगा लो, आ जाओ अब तो सांवरिया।
रो रो के पुकारे दिल मेरा खाटू वाले॥
जग ने तो बस दर्द दिया है, तूने ही मरहम लगाया।
जब भी विपदा आई मुझ पर, तूने ही मुझे बचाया॥
अब क्यों देर लगाई बाबा, आ जाओ अब तो सांवरिया।
रो रो के पुकारे दिल मेरा खाटू वाले॥
संजय मित्तल की ये पुकार, पहुँचे तेरे दरबार।
नीले घोड़े पर चढ़ आओ, मेरे पालनहार॥
रो रो के पुकारे दिल मेरा खाटू वाले, आ जाओ अब तो सांवरिया॥
भक्त पुकारे भाव सों, आवें नंदनंदन।
संजय मित्तल को प्रभु, देहु अभय वरदान॥