रो रो के पुकारे दिल मेरा खाटू वाले

संजय मित्तल
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॥ दोहा ॥

नैनन जल की धार बहे, हृदय विरह की पीर।
दरस दिखाओ सांवरे, बाँधो मन को धीर॥

॥ चौपाई ॥

रो रो के पुकारे दिल मेरा खाटू वाले, आ जाओ अब तो सांवरिया।
कब तक तरसाओगे हमको, आ जाओ अब तो सांवरिया॥
रो रो के पुकारे दिल मेरा खाटू वाले॥

तेरे बिना ये जीवन सूना, जैसे बिन पानी की नदिया।
तेरे दर्शन की प्यासी आँखें, रोती हैं ये अँखियां॥
इक बार गले से लगा लो, आ जाओ अब तो सांवरिया।
रो रो के पुकारे दिल मेरा खाटू वाले॥

जग ने तो बस दर्द दिया है, तूने ही मरहम लगाया।
जब भी विपदा आई मुझ पर, तूने ही मुझे बचाया॥
अब क्यों देर लगाई बाबा, आ जाओ अब तो सांवरिया।
रो रो के पुकारे दिल मेरा खाटू वाले॥

संजय मित्तल की ये पुकार, पहुँचे तेरे दरबार।
नीले घोड़े पर चढ़ आओ, मेरे पालनहार॥
रो रो के पुकारे दिल मेरा खाटू वाले, आ जाओ अब तो सांवरिया॥

॥ दोहा ॥

भक्त पुकारे भाव सों, आवें नंदनंदन।
संजय मित्तल को प्रभु, देहु अभय वरदान॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्याम विरह और दर्शन की अकुलाहट में डूबे भक्त के अश्रुपूर्ण हृदय की पुकार, जिसे संजय मित्तल जी ने अत्यंत मार्मिक सुरों में ढाला है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।