सद्गुरु श्री रितेश्वर जी

पारंपरिक
श्री कृष्ण संत साहित्य Bhakt Sadhguru Riteshwar Ji Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल: सद्गुरु श्री रितेश्वर जी

अन्य नाम - श्री रितेश्वर जी, ब्रह्मास्थि पूज्य सद्गुरु श्री श्री रितेश्वर जी महाराज

आराध्य - श्रीकृष्ण

जन्म - 5 जनवरी, 1973

जन्म स्थान - गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

भाषा - हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी

पिता - श्री विजय नारायण

माता - श्रीमती मंजू देवी

स्थापित संस्थाएँ: श्री आनंदम धाम ट्रस्ट वृन्दावन

प्रसिद्ध - भारतीय आध्यात्मिक नेता, प्रेरक वक्ता और लेखक

सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज एक भारतीय आध्यात्मिक नेता, प्रेरक वक्ता और लेखक हैं। सद्गुरु ने अपनी तपस्या यात्रा त्रिकुट पर्वत, उत्तराखंड के जंगलों, ब्रज चौरासी कोस, काशी और वृन्दावन में की है।

सद्गुरु ने भारत, नेपाल, स्कॉटलैंड, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सहित विभिन्न देशों में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले राधा माधव महोत्सव और गुरु पूर्णिमा महोत्सव जैसे सांस्कृतिक उत्सवों में बात की है।

सद्गुरु ने उत्तर प्रदेश के वृन्दावन में एक अंतरराष्ट्रीय, शैक्षिक और गैर-लाभकारी संगठन "श्री आनंदम धाम" की स्थापना की, जिसकी शाखाएँ भारत के राजधानी राज्यों में चल रही हैं। उनकी पहल भारत के विभिन्न संकटग्रस्त क्षेत्रों में 'जल बचाओ', 'पेड़ बचाओ', 'भविष्य बचाओ' अभियान चलाती है। सद्गुरु सनातन बोर्ड के भी समर्थक हैं, जो उन्हें भारत में शिक्षा के विकास के लिए आवश्यक लगता है। सद्गुरु उत्तर प्रदेश के वृन्दावन में एक निःशुल्क भोजन केंद्र लाडली प्रसादम भी चलाते हैं।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

सद्गुरु श्री रितेश्वर जी | Sadguru Shri Riteshwar Ji

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।