मंत्र: णमोकार महामंत्र

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

णमोकार मंत्र है न्यारा, इसने लाखों को तारा।

इस महा मंत्र का जाप करो, भव जल से मिले किनारा।

णमो अरिहंताणं,

णमो सिद्धाणं,

णमो आयरियाणं,

णमो उवज्झायाणं,

णमो लोए सव्व साहूणं ।

एसोपंचणमोक्कारो, सव्वपावप्पणासणो ।

मंगला णं च सव्वेसिं, पडमम हवई मंगलं ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।