रामदेव पीर

पारंपरिक
श्री राम संत साहित्य Bhakt Baba Ramdev Pir Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल | रामदेव पीर

असली नाम - रामदेव पीर

अन्य नाम - रामदेवजी, रामदेव पीर, रामशाह पीर

आराध्या - भगवान विष्णु

जन्म - भाद्रपक्ष शुक्ल द्वितीया, विक्रम संवत 1462

जन्म स्थान - उडुकाशमीर, शिव तहसील, बाड़मेर, राजस्थान

वैवाहिक स्थिति - विवाहित

भाषा - मारवाड़ी, संस्कृत

पिता - अजमल जी तंवर

माता - मीनल देवी

पत्नी - नेतलदे

प्रसिद्ध - बाबा रामदेव पीर राजस्थान के प्रसिद्ध लोक देवता हैं

वह चौदहवीं शताब्दी के शासक थे जिसके बारे में माना जाता था कि उनके पास चमत्कारी शक्तियाँ हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों और दलितों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया था। भारत में कई समाज उन्हें अपने अधिष्ठाता देवता के रूप में पूजते हैं। बाबा रामदेव पीर राजस्थान के प्रसिद्ध लोक देवता हैं। रामदेव पीर सभी मनुष्यों की समानता में विश्वास करते थे, चाहे वे उच्च या निम्न, अमीर या गरीब हों। उन्होंने अपनी इच्छाओं को पूरा करके दलितों की मदद की। उन्हें अक्सर घोड़े की पीठ पर चित्रित किया जाता है।

उनके अनुयायी राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, गुजरात और मध्य प्रदेश, मुंबई, दिल्ली और पाकिस्तान के सिंध में भी फैले हुए हैं। उनकी याद में राजस्थान में कई मेले लगते हैं। उनके नाम पर मंदिर भारत के कई राज्यों में पाए जाते हैं।

रामदेव जयंती, रामदेव की जन्म तिथि, भारत में हर साल उनके भक्तों द्वारा मनाई जाती है।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्तमाल: रामदेव पीर | Bhaktmal: Ramdev Pir

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।