रामानंद स्वामी

पारंपरिक
श्री कृष्ण संत साहित्य Bhakt Ramanand Swami Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल | रामानंद स्वामी

असली नाम - राम शर्मा

अन्य नाम - सहजानन्द स्वामी

गुरु - राघवानंद

शिष्य - स्वामीनारायण, नीलकंठ वर्णी

आराध्य - श्रीकृष्ण

जन्म - विक्रम संवत् 1795 (1738 ई.), जन्माष्टमी

जन्म स्थान - अयोध्या

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

भाषा - संस्कृत, हिंदी

पिता - अजय शर्मा

माता - सुमति

प्रसिद्ध - आध्यात्मिक संत, वैष्णव वेदांत

संस्थापक - उद्धव सम्प्रदाय

रामानंद स्वामी का जन्म विक्रम संवत 1795 (1738 ई.) में अयोध्या में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्हें कृष्ण के घनिष्ठ मित्र उद्धव का अवतार माना जाता था। रामानन्द उद्धव सम्प्रदाय के संस्थापक एवं मुखिया थे।

रामानंद स्वामी ने वैष्णव के विशिष्टाद्वैत सिद्धांत को अपनाया, जिसे पहली बार कई शताब्दियों पहले रामानुज ने प्रतिपादित किया था। अपने प्रारंभिक जीवन में दक्षिणी भारत में श्रीरंगम की यात्रा के दौरान, रामानंद स्वामी ने कहा कि रामानुज ने उन्हें सपने में दीक्षा दी और उन्हें अपने वंश में एक आचार्य के रूप में नियुक्त किया। इसके बाद रामानंद स्वामी ने रामानुज के दर्शन का प्रसार करने के लिए पश्चिम से सौराष्ट्र की यात्रा की। 1858 में मरने से पहले, रामानंद स्वामी ने उद्धव संप्रदाय की बागडोर स्वामीनारायण को सौंप दी।

रामानंद स्वामी के पास अपने भक्तों को समाधि में डालने और उन्हें भगवान के दर्शन कराने की शक्तियाँ थीं।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

रामानंद स्वामी | Ramanand Swami

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।