रामलिंग स्वामीगल

पारंपरिक
श्री राम संत साहित्य Bhakt Ramalinga Swamigal Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल: रामलिंग स्वामीगल

वास्तविक नाम - तिरुवरुतप्रकाश वल्लालर चिदम्बरम रामलिंगम

अन्य नाम - वल्लालर, रामलिंग स्वामीगल और रामलिंग आदिगल

गुरु - तिरुवल्लुवर

आराध्य - शिवजी, मुरुगन

जन्म – 5 अक्टूबर 1823

जन्म स्थान - मरुदुर, चिदम्बरम, तमिलनाडु

गायब - 30 जनवरी, 1874 (उम्र 50)

स्थान - मेट्टुकुप्पम, वडालूर, कुड्डालोर जिला, तमिलनाडु

वैवाहिक स्थिति: विवाहित

भाषा - तमिल, संस्कृत

पिता – चिन्नम्मई

माता - रामय्या पिल्लई

प्रसिद्ध - भारतीय आध्यात्मिक गुरु, ज्ञान सिद्ध

संत रामलिंग स्वामी, जिन्हें तमिलनाडु में 'वल्लालर' के नाम से जाना जाता है, 19वीं सदी की शुरुआत में एक संत कवि थे। एक प्रतिभाशाली और साथ ही एक प्रबुद्ध गुरु जिन्होंने प्रेम और करुणा को ईश्वर के प्रति मूलमंत्र के रूप में सिखाया। उन्होंने शास्त्रीय तमिल में ईश्वर के बारे में करीब 6000 गाने गाए हैं। रामलिंगा ने शाश्वत शक्ति के प्रतीक के रूप में जलते दीपक की लौ की पूजा करने की अवधारणा की वकालत की।

उन्होंने अपने समय का तमिल शैव साहित्य विशेषकर तिरुमुलर का तिरुमंतीरम पढ़ा। उन्होंने भक्ति और प्रेम के साथ भगवान शिव की स्तुति में गीत गाए। उनका सिद्धांत किसी भी रूप से परे बहुत सरल था। उन्होंने उपदेश दिया, कि अंतिम वास्तविकता 'ज्योति' है और सबके अंदर बैठी हुई भी एक ही 'ज्योति' है। उन्होंने अपने आस-पास के सभी लोगों के भीतर विराजमान दिव्यता के बारे में सच्चाई व्यक्त करने की पूरी कोशिश की।

30 जनवरी 1874 को, रामलिंगम ने कमरे में प्रवेश किया, खुद को अंदर बंद कर लिया और अपने अनुयायियों से इसे न खोलने के लिए कहा। उसके बाद वो अदृश्य होगये थे। संत रामलिंग स्वामी की याद में तमिलनाडु सरकार ने 17 अगस्त 2007 को डाक टिकट जारी किया था।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्तमाल: रामलिंग स्वामीगल - Bhaktmal: Ramalinga Swamigal

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।