राम सिया राम सिया राम जय जय राम

कन्हैया मित्तल
श्री राम भजन भजन कन्हैया मित्तल
॥ दोहा ॥

राम सिया राम सिया राम जय जय राम।
करहु कृपा प्रभु दीन दयाला, पूरण कीजो काम॥

॥ चौपाई ॥

राम सिया राम सिया राम जय जय राम।
राम सिया राम सिया राम जय जय राम॥

कौशल्या सुत राम हमारे, जनक दुलारी सीता माई।
लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न संग, संकट हरन रघुराई॥
हनुमत प्यारे दास प्रभु के, जपते आठों याम।
राम सिया राम सिया राम जय जय राम॥

जिस घर में प्रभु राम विराजे, वो घर स्वर्ग समाना।
कन्हैया मित्तल शीश झुकाकर, गाए राम गुण गाना॥
राम सिया राम सिया राम जय जय राम॥

॥ दोहा ॥

श्री रघुवर कोमल कमलनयन, कौशल्या आनंदकंद।
कन्हैया मित्तल वंदना, जयति जयति जगवंद॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

प्रभु श्री राम और माता जानकी के युगल चरण कमलों में समर्पित परम पावन महामंत्र और भक्ति रस।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।