राम जी की निकली सवारी राम जी की लीला है न्यारी

कन्हैया मित्तल
श्री राम भजन भजन कन्हैया मित्तल
॥ दोहा ॥

राम नाम जग दीप है, धरहु जीह देहरी द्वार।
तुलसी भीतर बाहरेहुं, जौं चाहसि उजियार॥

॥ चौपाई ॥

राम जी की निकली सवारी, राम जी की लीला है न्यारी।
एक तरफ लक्ष्मण एक तरफ सीता, बीच में जगत के पालनहारी॥
राम जी की निकली सवारी॥

फूलों की वर्षा गगन से होवे, देवता भी दर्शन को रोवे।
अवध नगरिया में मंगल गावें, सब नर नारी शीश झुकावें॥
जय श्री राम की गूँज उठी है, धन्य हुई सृष्टि सारी॥
राम जी की निकली सवारी॥

जिसने देखा रूप ये प्यारा, उसका हो गया भव से किनारा।
दुष्ट दलन रघुवंश शिरोमणि, राम नाम है जग का सहारा॥
सकल मनोरथ पूरण कीन्हे, जय हो धनुर्धारी॥
राम जी की निकली सवारी॥

कन्हैया मित्तल गाए स्तुति, अवध पति भगवान की।
सदा सलामत रहे हमारे, ध्वजा श्री राम की॥
राम जी की निकली सवारी, राम जी की लीला है न्यारी॥

॥ दोहा ॥

रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम।
कन्हैया मित्तल शरण में, पावे पद विश्राम॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

अवध नरेश प्रभु श्री राम की शोभायात्रा, सीता-लक्ष्मण सहित उनकी मनमोहक झांकी और जयघोष का उल्लासमय भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।