राम नाम जग दीप है, धरहु जीह देहरी द्वार।
तुलसी भीतर बाहरेहुं, जौं चाहसि उजियार॥
राम जी की निकली सवारी, राम जी की लीला है न्यारी।
एक तरफ लक्ष्मण एक तरफ सीता, बीच में जगत के पालनहारी॥
राम जी की निकली सवारी॥
फूलों की वर्षा गगन से होवे, देवता भी दर्शन को रोवे।
अवध नगरिया में मंगल गावें, सब नर नारी शीश झुकावें॥
जय श्री राम की गूँज उठी है, धन्य हुई सृष्टि सारी॥
राम जी की निकली सवारी॥
जिसने देखा रूप ये प्यारा, उसका हो गया भव से किनारा।
दुष्ट दलन रघुवंश शिरोमणि, राम नाम है जग का सहारा॥
सकल मनोरथ पूरण कीन्हे, जय हो धनुर्धारी॥
राम जी की निकली सवारी॥
कन्हैया मित्तल गाए स्तुति, अवध पति भगवान की।
सदा सलामत रहे हमारे, ध्वजा श्री राम की॥
राम जी की निकली सवारी, राम जी की लीला है न्यारी॥
रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम।
कन्हैया मित्तल शरण में, पावे पद विश्राम॥