राजन के राजा महाराजन के महाराजा - शब्द कीर्तन (Rajan Ke Raja, Maharajan Ke Maharaja)

गुरु नानक देव जी
अन्य भजन Bhajan Guru Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

छत्रधारी छत्रपति छैल रूप छितनाथ

छौनी कर छाया बर छत्रीपत गाईइ

राजन के राजा महाराजन के महाराजा

ऐसा राज्य छोड़ और दूजा कौन धियाएई

राजन के राजा महाराजन के महाराजा

राजन के राजा महाराजन के महाराजा

छत्रधारी छत्रपति छैल रूप छितनाथ

छौनी कर छाया बर छत्रीपत गाईइ

छत्रधारी छत्रपति छैल रूप छितनाथ

छौनी कर छाया बर छत्रीपत गाईइ

राजन के राजा महाराजन के महाराजा

राजन के राजा महाराजन के महाराजा

बिसुनाथ विश्वंभर बेदनाथ बालाकर

बिसुनाथ विश्वंभर बेदनाथ बालाकर

बाजीगरी बन धारी बंधन बथाईई।

निओली करम दूधाधारी बिद्याधर ब्रह्मचारी

ध्यान को लगवै नैक ध्यान हुन पाई।

ध्यान को लगवै नैक ध्यान हुन पाई।

राजन के राजा महाराजन के महाराजा

राजन के राजा महाराजन के महाराजा

ऐसा राज्य छोड़ दो और दूजा कौन धियाएई

ऐसा राज्य छोड़ दो और दूजा कौन धियाएई

राजन के राजा महाराजन के महाराजा

राजन के राजा महाराजन के महाराजा

राजन के राजा महाराजन के महाराजा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।