राहु मंत्र

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

राहु का अपना कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है। यह एक छाया ग्रह है, लेकिन छाया ग्रह होने के बावजूद कुंडली पर इसका गहरा प्रभाव रहता है। राहु के प्रभाव हमेशा अशुभ नहीं होते।

आधुनिक समय में, कई नई प्रौद्योगिकियां राहु के प्रभाव में आती हैं। इसे हमेशा अशुभ नहीं माना जा सकता। हालांकि, यह सच है कि कभी-कभी स्वास्थ्य की दृष्टि से, यह ऐसी बीमारियों का कारण बन सकता है जिन्हें ठीक होने में समय लगता है।

इस दौरान, व्यक्ति की बुद्धि कुछ हद तक भ्रमित हो जाती है। वे ऐसे निर्णय लेते हैं जिनका उन्हें भविष्य में पछतावा हो सकता है। सही और गलत में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। राहु के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए राहु मंत्र का जाप करना चाहिए। इस मंत्र का जाप रात में करना चाहिए और शनिवार से शुरू करना चाहिए।

राहु का वैदिक मंत्र

ऊँ कयानश्चित्र आभुवदूतीसदा वृध: सखा । कयाशश्चिष्ठया वृता ।

राहु का तांत्रोक्त मंत्र

ऊँ ऎं ह्रीं राहवे नम:

ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:

ऊँ ह्रीं ह्रीं राहवे नम:

नाम मंत्र

ऊँ रां राहवे नम:

राहु का पौराणिक मंत्र

ऊँ अर्धकायं महावीर्य चन्द्रादित्यविमर्दनम ।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

राहु मंत्र | Rahu Mantra

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।